विश्व प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह से जुड़ा एक बड़ा विवाद सामने आया है। दरगाह के प्रसिद्ध देग ठेका प्रकरण में 20 लाख रुपये की कथित हेराफेरी और गबन का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। इस वित्तीय अनियमितता के सामने आने के बाद दरगाह से जुड़े हलकों में नया विवाद खड़ा हो गया है।
इस पूरे मामले को लेकर अंजुमन के वर्तमान सचिव शेखजादा लियाकत अली चिश्ती की ओर से पुलिस अधीक्षक को लिखित में एक शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसके आधार पर दरगाह थाना पुलिस ने अंजुमन यादगार चिश्तिया शेखजादगान खुद्दाम ख्वाजा साहब के पूर्व सचिव शेखजादा एहतेशाम चिश्ती और देग ठेकेदार सैयद अनवर मोहम्मद नियाजी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
2018 का है मामला
मामले की गंभीरता को देखते हुए दरगाह थाने के अधिकारियों ने बताया कि थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार यह पूरा विवाद साल 2018 के वार्षिक उर्स के दौरान का है। उस समय दरगाह शरीफ की बड़ी और छोटी देग का ठेका 3 करोड़ 77 लाख 40 हजार 100 रुपये में दिया गया था। तयशुदा ठेका शर्तों के मुताबिक कुल राशि में से अंजुमन संस्था के हिस्से में 1 करोड़ 25 लाख 80 हजार 33 रुपये आने थे।
ठेकेदार ने नहीं जमा कराए 20 लाख रुपये
इसके एवज में देग ठेकेदार सैयद अनवर मोहम्मद नियाजी ने बैंक चेक और नकद माध्यमों से संस्था के पास 1 करोड़ 5 लाख 80 हजार रुपये तो जमा करा दिए थे, लेकिन 20 लाख रुपये की राशि बकाया रह गई थी। इसी बकाया राशि को लेकर अब वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप लगाया गया है। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और वित्तीय लेनदेन के दस्तावेजों की गहनता से जांच की जा रही है।
समय नहीं जमा कराए पैसे
इस मामले को लेकर अंजुमन कमेटी के पूर्व सचिव सैयद सरवर चिश्ती ने एक बयान जारी कर कहा कि दो दिन से दरगाह में गबन की बातें चल रही हैं, लेकिन न तो यह कोई गबन हुआ है और न चोरी हुई है। एक व्यक्ति ने कॉन्ट्रैक्ट के पैसे जमा नहीं कराए, उस पर एफआईआर दर्ज की गई है। ऑडिटेड अकाउंट्स हैं, तमाम चीजें अपनी जगह मौजूद हैं। उन्होंने पैसे वक्त पर जमा नहीं कराए, इसीलिए केस लगा है। कोई चोरी डकैती नहीं हुई है। उन्होंने कहा, "एक शख्स ने पैसे नहीं दिए थे, देख के अकाउंट जमा नहीं कराए थे, जो कि ऑडिटेड अकाउंट्स हैं, वक्त पर जमा नहीं कराए, तो उस पर एफआईआर दर्ज की गई है।"
(अजमेर से राजकुमार वर्मा की रिपोर्ट)
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